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रुद्रपुर: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के अंतर्गत जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क इलाज की सुविधा प्रदान कर रहे हैं, वहीं कुछ निजी हॉस्पिटल इस योजना की खुलेआम धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं।
ताजा मामला एक निजी हॉस्पिटल से जुड़ा है, जहां नवजात शिशु का इलाज आयुष्मान योजना के अंतर्गत चल रहा था, इसके बावजूद हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा पीड़ित परिवार से हजारों रुपये वसूल लिए गए। हैरानी की बात यह है कि यह सब उस योजना के तहत हुआ, जिसमें इलाज पूरी तरह निशुल्क होना चाहिए।
आरोप है कि जिन पैसों की वसूली हॉस्पिटल द्वारा की जा रही है, उनका न तो कोई हॉस्पिटल से बिल दिया जाता है और न ही ऑनलाइन या डिजिटल भुगतान की कोई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। हॉस्पिटल प्रबंधन मरीजों और उनके परिजनों को केवल कैश भुगतान के लिए मजबूर करता है, जिससे यह पूरा लेन-देन संदेह के घेरे में आ जाता है।स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार हॉस्पिटल को प्रत्येक भुगतान का वैध बिल देना और डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। यह न केवल आयुष्मान योजना के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गरीब और असहाय परिवारों के साथ खुला शोषण भी माना जा रहा है।
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। इससे यह प्रतीत होता है कि विभाग की गहरी चुप्पी हॉस्पिटल की मनमानी को संरक्षण दे रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब देश के प्रधानमंत्री स्वयं गरीबों के लिए निशुल्क इलाज की गारंटी दे रहे हैं, तो फिर अस्पतालों को लूट की छूट किसके संरक्षण में मिल रही है?
क्या ऐसे हॉस्पिटल पर प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करेगा या फिर आयुष्मान योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी?
👉 जल्द ही हम आपको उस पीड़ित परिवार से रूबरू कराएंगे, जिसके नवजात बच्चे के इलाज के नाम पर हॉस्पिटल द्वारा आयुष्मान योजना के बावजूद हजारों रुपये वसूले गए।
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