लाखों के फर्जी बिल का खेल, रुद्रपुर के मेडिसिटी अस्पताल पर गंभीर आरोप

ख़बरीलाल खोज ( मनीश बावा) रुद्रपुर: जनपद उधम सिंह नगर के किच्छा रोड स्थित दि मेडिसिटी अस्पताल पर कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के फंड से फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भुगतान लेने का गंभीर आरोप लगा है। इस संबंध में सामाजिक संगठन भाईचारा एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष के.पी गंगवार एवं सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा ईएसआईसी के महानिदेशक, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार को शिकायत पत्र भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
शिकायत में बताया गया है कि दि मेडिसिटी अस्पताल और ईएसआईसी अस्पताल रुद्रपुर के बीच 5 अगस्त 2025 को ईएसआई लाभार्थियों को माध्यमिक उपचार (डायग्नोस्टिक सहित) उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध हुआ था। आरोप है कि अस्पताल द्वारा ईएसआई के तहत इलाज कराए गए कुछ मरीजों के औचित्य पत्र (जस्टिफिकेशन लेटर) फर्जी और कूटरचित पाए गए हैं, जिन पर लगी मुहर और हस्ताक्षर भी जाली बताए जा रहे हैं।
शिकायत के अनुसार, ईएसआईसी अस्पताल रुद्रपुर के चिकित्सा अधीक्षक ने जांच में पाया कि मरीजो के उपचार से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितताएं हैं। साथ ही अनुबंध की धारा 4.2 के तहत आवश्यक सत्यापन किए बिना ही उपचार शुरू कर दिया गया, जो निर्धारित नियमों के विपरीत है। इस मामले में चिकित्सा अधीक्षक द्वारा 3 अक्टूबर 2025 को दि मेडिसिटी अस्पताल को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच में अनियमितता सामने आने के बावजूद अस्पताल की ईएसआईसी पैनल से स्थायी रूप से आबद्धता समाप्त नहीं की गई है और न ही सरकारी धन की वसूली के लिए कोई कार्रवाई की गई है। आरोप यह भी है कि अस्पताल द्वारा लाखों रुपये का अनुचित लाभ लेने के बाद भी उसे दोबारा पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इससे पहले भी दि मेडिसिटी अस्पताल पर ईएसआईसी फंड के दुरुपयोग के आरोप लग चुके हैं और अस्पताल की आबद्धता अस्थायी रूप से समाप्त की गई थी। वहीं अस्पताल के डायरेक्टर का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने ईएसआईसी अधिकारियों पर 50 लाख रुपये की अनुचित मांग का आरोप लगाया था।
शिकायतकर्ता ने महानिदेशक ईएसआईसी से पूरे प्रकरण की किसी उच्च स्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त भुगतान की वसूली करने और मामले में संलिप्त अस्पताल प्रबंधन व अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।



