रिटायर्ड नेवी कैप्टन का बड़ा आरोप: पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर 55 लाख की संपत्ति हड़पने की साजिश

ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा)रुद्रपुर: भारतीय नौसेना में लगभग 40 वर्षों तक सेवा देने वाले सेवानिवृत्त कैप्टन मुकेश बत्रा ने अपनी संपत्ति से जुड़े विवाद में गंभीर आरोप लगाते हुए पूरा घटनाक्रम सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूर्ण विश्वास है, लेकिन समाजहित में तथ्यों को सामने लाना आवश्यक है।
कैप्टन बत्रा के अनुसार अक्टूबर 2021 में फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित उनके दो फ्लैट श्री बलविंदर सिंह को बेचे गए थे, जिनका भुगतान किश्तों में हुआ। इनमें से एक फ्लैट की रजिस्ट्री बलविंदर सिंह ने अपनी पत्नी के नाम कराई।
इसके बाद वर्ष 2022 में आवास विकास, रुद्रपुर स्थित मकान संख्या सी-48 का सौदा 55 लाख रुपये में श्री कुलबीर सिंह ढिल्लों और श्री बलविंदर सिंह बल्लू के साथ तय हुआ।
उन्होंने बताया कि उनकी माता स्व. श्रीमती राजरानी बत्रा का निधन सितंबर 2021 में हुआ था, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र जून 2022 में जारी हुआ। नामांतरण की प्रक्रिया 26 नवंबर 2022 को पूरी हुई और संपत्ति उनके नाम दर्ज हो गई। 30 नवंबर 2022 को विश्वास के आधार पर उन्होंने बलविंदर सिंह को सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी दे दी।
फरवरी 2023 में संपत्ति फ्रीहोल्ड हुई और अप्रैल 2023 में 55 लाख रुपये में विक्रय इकरारनामा किया गया, जिसकी अंतिम भुगतान तिथि 31 मार्च 2024 तय थी।
कैप्टन बत्रा का आरोप है कि तय भुगतान करने के बजाय पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करते हुए उनकी जानकारी के बिना संपत्ति से संबंधित एक अन्य अनुबंध तैयार कराया गया, जो बलविंदर सिंह की पत्नी के नाम बताया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दो अलग-अलग राशियों (55 लाख और 60 लाख रुपये) के इकरारनामे बनाए गए, जिससे साझेदार को भ्रमित किया जा सके।
मामले की जानकारी मिलने पर 19 सितंबर 2024 को पावर ऑफ अटॉर्नी निरस्त कर दी गई। इसके बाद वर्ष 2025 में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, जिसमें कैप्टन बत्रा और उनकी पत्नी को नामजद किया गया, जबकि उनके अनुसार उनकी पत्नी कभी रुद्रपुर नहीं आईं।
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने सी-48 संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का स्थगन आदेश जारी किया है।
कैप्टन मुकेश बत्रा ने कहा, “मैं न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करूंगा, किंतु किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और संस्थाओं के दुरुपयोग को समाज के हित में उजागर करना आवश्यक है।”



