
स्मार्ट मीटरों पर सरकार की रोक से बेनकाब हुई सच्चाई: तिलकराज बेहड़ ने सरकार, निगम और भाजपा प्रतिनिधियों पर साधा निशाना
रुद्रपुर: प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। किच्छा के विधायक तिलकराज बेहड़ ने अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार द्वारा दिए गए रोक के निर्देशों ने साबित कर दिया है कि स्मार्ट मीटरों को लेकर जनता जिन समस्याओं और अन्याय का सामना कर रही थी, वह वास्तविक थीं, न कि विरोध करने वालों की मनगढंत बातें।
बेहड़ ने कहा कि वह शुरू से ही पुराने, सही-सलामत मीटरों को हटाकर स्मार्ट मीटर लगाने का कड़ा विरोध करते रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि आंदोलन के दौरान उन्होंने सड़क पर स्मार्ट मीटर पटककर तोड़ा भी था, लेकिन इसके बावजूद विभाग उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। उन्होंने कहा कि राज्यभर से शिकायतें आने लगीं तो सरकार ने शिविर लगवाकर “समाधान” करने का दिखावा किया और अब मजबूरी में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी गई है, साथ ही जांच की बात भी कही जा रही है।
विधायक ने भाजपा जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने प्रतिष्ठानों व आवासों पर स्मार्ट मीटर लगाकर इसका प्रचार किया और मीटरों के गुणगान किए, जबकि वह लगातार इसके खिलाफ चेतावनी देते रहे। उन्होंने कहा कि यदि उनकी ही पार्टी का पूरा समर्थन मिला होता, तो यह निर्णय बहुत पहले लिया जा सकता था।
बेहड़ ने कहा कि निकाय चुनाव में उन्होंने स्मार्ट मीटर का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था, और अब 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के घोषणापत्र में स्मार्ट मीटर हटाने का वादा शामिल कराने के लिए वह वरिष्ठ नेताओं से बात करेंगे।
उन्होंने सरकार, अडानी-अंबानी और भाजपा नेताओं पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए। बेहड़ ने मांग की कि स्मार्ट मीटर हटाकर दोबारा पुराने मीटर लगाए जाएं। साथ ही उन्होंने विद्युत विभाग के एमडी पर भी भ्रष्टाचार में लिप्त होने का गंभीर आरोप लगाया और कहा कि विभाग के अधिकारी वसूली में लगे हुए हैं।
वार्ता के दौरान संजय जुनेजा, मोहन खेड़ा, गौरव खुराना, मोनिका धाली, इन्द्रजीत सिंह और परिमल राय सहित कई लोग मौजूद रहे।



