(ख़बरीलाल ख़ोज)काशीपुर,पैगा: सुखवंत सिंह किसान की आत्महत्या ने न केवल परिवार को तोड़ा, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल भी खोल दी है। 3 करोड़ 80 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में केवल 25 प्रतिशत रकम (लगभग 95 लाख) ही परिवार को लौटाई गई है। शेष 75 प्रतिशत की वसूली के लिए प्रशासन ने 19 जनवरी तक समय मांगा है, वरना परिवार ने हाईवे जाम करने की चेतावनी दी है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता और प्रशासन की प्राथमिकता अक्सर जनता की सुरक्षा या न्याय नहीं, बल्कि अपने आप को बचाना है। सुखवंत की मौत तक सिस्टम की नींद खुली नहीं और केवल सीएम के सख्त रुख के बाद ही पुलिस महकमे में निलंबन की बड़ी कार्रवाई हुई—थानाध्यक्ष आईटीआई और पूरी पैगा चौकी निलंबित।
एसडीएम और एसपी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष होगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या यही वही सिस्टम नहीं है, जिसने किसान की जिंदगी को नजरअंदाज किया और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया? जनता का गुस्सा और संवेदना स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जब अंतिम संस्कार में श्मशान घाट पर हजारों लोग उमड़े।
यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विफलता का आईना है। लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण ही आज किसान को अपनी जान देना पड़ा। यदि 19 जनवरी तक वादे पूरे नहीं हुए, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
सुखवंत की चिता पर उठे धुएं में अब सवाल उठता है—क्या यह सिस्टम अब भी न्याय और जवाबदेही के बजाय केवल अफसरशाही बचाने में लगा रहेगा? जनता की नजरें अब हर कदम पर हैं और वह किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी।




