कांग्रेस में ठुकराल की एंट्री से गरमाई राजनीति, भाजपा की बयानबाज़ी ने खोले संकेत

ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा) रुद्रपुर: जिले की राजनीति में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। ठुकराल की एंट्री के बाद जहां कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है, वहीं भाजपा खेमे में बयानबाज़ी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा।
कांग्रेस में शामिल होते ही ठुकराल ने अपने पुराने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। उनके लगातार आक्रामक बयानों ने भाजपा नेताओं को खुलकर जवाब देने पर मजबूर कर दिया है। जिले भर में भाजपा पदाधिकारी एक के बाद एक प्रेस बयान जारी कर ठुकराल पर निशाना साध रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो किसी नेता के पार्टी बदलने के बाद इस तरह की तीखी प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि मामला साधारण नहीं है। ठुकराल का स्थानीय स्तर पर मजबूत जनाधार रहा है, और यही वजह है कि उनकी कांग्रेस में एंट्री को भाजपा हल्के में नहीं ले रही।
भाजपा की ओर से भले ही यह कहा जा रहा हो कि ठुकराल के जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन लगातार हो रही बयानबाज़ी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। संगठन के नेता जहां एक ओर ठुकराल की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश में भी जुटे हैं।
उधर, कांग्रेस इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। पार्टी नेताओं का दावा है कि ठुकराल की एंट्री से जिले में कांग्रेस को नई ऊर्जा मिली है और आगामी चुनाव में इसका सीधा फायदा मिलेगा।
अब सवाल यह है कि क्या ठुकराल का कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक घटना है या फिर यह आने वाले चुनावों से पहले बड़ा सियासी झटका साबित होगा? फिलहाल इतना तय है कि रुद्रपुर की राजनीति में तापमान बढ़ चुका है और आने वाले दिनों में यह सियासी जंग और भी दिलचस्प होने वाली है।
निष्कर्ष:
ठुकराल की कांग्रेस जॉइनिंग से जिले की राजनीति जरूर गरमा गई है। बीजेपी की सक्रिय प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि वह इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं ले रही, लेकिन इसे सीधे “डर” कहना राजनीतिक सरलीकरण होगा। असली असर चुनाव के समय ही साफ दिखेगा।



