Breaking News

मेडिसिटी अस्पताल मामले में मुख्यालय स्तर पर सौंपी गई जांच, ESIC हरकत में

मेडिसिटी अस्पताल मामले में मुख्यालय स्तर पर सौंपी गई जांच, ESIC हरकत में

ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा) रुद्रपुर: उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर स्थित दि मेडिसिटी अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के तहत इलाज के नाम पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भुगतान प्राप्त करने का मामला सामने आने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब रुद्रपुर के समाजसेवी भाईचारा एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष के.पी. गंगवार ने 26 फरवरी 2026 को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत CPGRAMS पोर्टल के माध्यम से ESIC मुख्यालय, नई दिल्ली तक पहुंची, जिसके बाद अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।

फर्जी दस्तावेजों का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दि मेडिसिटी अस्पताल ने कुछ मरीजों—के इलाज के लिए जो औचित्य पत्र (Justification Letter) प्रस्तुत किए, वे फर्जी और कूटरचित हैं। इन दस्तावेजों में इस्तेमाल मुहर और हस्ताक्षरों को भी संदिग्ध बताया गया है।

नियमों की अनदेखी का आरोप
आरोप यह भी है कि अस्पताल ने ESIC के साथ हुए अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करते हुए आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया पूरी किए बिना ही मरीजों का उपचार शुरू कर दिया। अनुबंध की धारा 4.2 के तहत यह सत्यापन अनिवार्य है, लेकिन शिकायत के अनुसार इसका पालन नहीं किया गया।

अधिकारियों पर भी सवाल
मामले में सिर्फ अस्पताल ही नहीं, बल्कि ESIC अस्पताल रुद्रपुर के चिकित्सा अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शिकायत में इन अधिकारियों पर सरकारी धन के दुरुपयोग और अनियमितताओं को नजरअंदाज करने के आरोप लगाए गए हैं।

दोबारा टाई-अप पर उठे सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपों और संभावित जांच के बावजूद संबंधित अस्पताल को फिर से ESIC के साथ टाई-अप के लिए सूचीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया जारी होने की बात सामने आई है, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उच्च स्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे प्रकरण ने न केवल ESIC की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग किस स्तर तक हो सकता है।
अब निगाहें ESIC मुख्यालय पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.