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धरना,अफसर और कैमरे…अवकाश के दिन कलेक्ट्रेट में हलचल, क्या राजनीतिक पटकथा पहले से थी तैयार…..?

धरना,अफसर और कैमरे…अवकाश के दिन कलेक्ट्रेट में हलचल, क्या राजनीतिक पटकथा पहले से थी तैयार…..?

ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा)रुद्रपुर:कलेक्ट्रेट परिसर में भूमि विवाद को लेकर हुए धरने के बाद अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अवकाश के दिन अचानक महिला का कलेक्ट्रेट पहुंचना और एक साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों का मौके पर मौजूद होना क्या केवल संयोग था, या इसके पीछे कोई पूर्व नियोजित राजनीतिक रणनीति काम कर रही थी…..?
सूत्रों की मानें तो इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई। चर्चा है कि एक सत्ताधारी दल से जुड़े प्रभावशाली नेता द्वारा ही प्रशासनिक तंत्र और मीडिया को एक साथ सक्रिय करने की पटकथा रची गई, ताकि इसे एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में पेश किया जा सके।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि धरना शुरू होते ही जिस तेजी से प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हुई, उससे यह सवाल और गहरा गया कि क्या अधिकारियों को पहले से अलर्ट किया गया था…..? वहीं, कुछ राजनीतिक का कहना है कि इस तरह के घटनाक्रमों के जरिए विपक्ष पर दबाव बनाने और सरकार की “संवेदनशील छवि” गढ़ने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, इस पूरे मामले में प्रशासन या किसी राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जिस प्रकार अवकाश के दिन कलेक्ट्रेट में अचानक हलचल बढ़ी, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस कथित राजनीतिक साजिश की भी जांच होगी, या यह मामला यहीं ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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