छोटी-छोटी किस्तों से ‘बड़ा खेल’,
बाँसुरी निधि के नाम पर खाताधारकों लाखों का चूना,
कलेक्शन एजेंट गिरफ्तार
बाँसुरी म्युचुअल बेनिफिट इंडिया निधि लिमिटेड के नाम पर जमा कराई जाती थी रकम, मैच्योरिटी पर पैसा न मिलने पर खुला मामला—चेयरमैन, एमडी और डायरेक्टर की भूमिका भी जांच के घेरे में
सितारगंज। आरडी और एफडी में रकम जमा कराकर एक साल में मैच्योरिटी पर पैसा वापस दिलाने का भरोसा देकर लोगों से लाखों रुपये जुटाने के मामले में सितारगंज पुलिस ने वांछित कलेक्शन एजेंट को गिरफ्तार किया है। पुलिस की पूछताछ और अब तक की विवेचना में करीब 50 से 60 खाताधारकों से 15 से 20 लाख रुपये एकत्र किए जाने की बात सामने आई है। खाताधारकों की रकम कथित तौर पर कंपनी से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी पुलिस को मिली है।
कोतवाली सितारगंज में इस मामले में एफआईआर संख्या 18/2026, धारा 316(5) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में वांछित आरोपी राजेन्द्र प्रसाद पुत्र सीताराम, निवासी ग्राम रम्पुरा नत्थू, थाना बरखेड़ा, पीलीभीत (उप्र), उम्र 42 वर्ष को दो अक्टूबर की शाम सितारगंज मंडी क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
खाताधारकों से रोजाना 50 से 150 रुपये तक कराता था जमा
पुलिस के अनुसार आरोपी स्वयं को बाँसुरी म्युचुअल बेनिफिट इंडिया निधि लिमिटेड का फील्ड मार्केटिंग/कलेक्शन एजेंट बताकर लोगों को आरडी/एफडी खाते खुलवाने के लिए प्रेरित करता था। खाताधारकों से प्रतिदिन 50, 100 या 150 रुपये अथवा निर्धारित किस्त के रूप में नकद रकम ली जाती थी। रकम जमा करने के बाद खाता पुस्तिका में प्रविष्टि कर आरोपी अपने हस्ताक्षर भी करता था।
बताया गया कि लोगों को भरोसा दिलाया जाता था कि करीब एक वर्ष तक नियमित किस्त जमा करने के बाद उन्हें मैच्योरिटी पर उनकी रकम वापस मिल जाएगी। लेकिन अवधि पूरी होने के बाद जब खाताधारकों को रकम नहीं मिली तो मामला पुलिस तक पहुंचा।
11 पासबुक, 10 बॉन्ड और सात किस्त रसीदें कब्जे में
विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़ितों और गवाहों के बयान दर्ज किए। उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई 11 मूल खाता पुस्तिकाएं, 10 मूल बॉन्ड पेपर और सात मूल किस्त रसीदें पुलिस ने कब्जे में ली हैं। इन दस्तावेजों को मामले में अहम साक्ष्य माना जा रहा है।
एजेंट ने बताया—50-60 लोगों से जुटाए 15-20 लाख
पूछताछ में राजेन्द्र प्रसाद ने पुलिस को बताया कि वह पांच जून 2023 को कंपनी में कलेक्शन एजेंट के रूप में नियुक्त हुआ था। सितारगंज क्षेत्र में लोगों के खाते खुलवाने और उनसे रकम एकत्र करने का काम उसके जिम्मे था।
आरोपी के अनुसार उसने करीब 50-60 लोगों के खाते खुलवाए और उनसे लगभग 15-20 लाख रुपये एकत्र किए। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने यह रकम अजय गंगवार और राजकुमार गंगवार को दिए जाने की बात कही है। इसके अलावा अजय गंगवार के कहने पर अपने बैंक खाते से ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करने की जानकारी भी आरोपी ने दी है।
छह माह से चल रहा था फरार
खाताधारकों को रकम वापस नहीं मिलने के बाद आरोपी ने सितारगंज क्षेत्र में कलेक्शन का काम बंद कर दिया था। पुलिस के अनुसार वह करीब छह माह से फरार चल रहा था। दो अक्टूबर को मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने सितारगंज मंडी में घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।
चेयरमैन, एमडी और डायरेक्टर की भूमिका जांच के घेरे में
पूछताछ और विवेचना में अजय गंगवार, राजकुमार गंगवार और गीता देवी के नाम भी सामने आए हैं। आरोपी के अनुसार अजय गंगवार कंपनी के चेयरमैन, राजकुमार गंगवार मैनेजिंग डायरेक्टर और गीता देवी डायरेक्टर हैं।
पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर मामले में धारा 61(2)/3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की है। प्रकाश में आए लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस टीम
प्रभारी निरीक्षक सुन्दरम शर्मा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक जावेद मलिक, उपनिरीक्षक जगत सिंह साही, हेड कांस्टेबल मतलूब खान और कांस्टेबल कमल गहतौड़ी की टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया।


