किसानों के पसीने का अपमान या बड़ी साजिश….? गांधी पार्क के दो वायरल वीडियो ने खड़े किए गंभीर सवाल

एक वीडियो में जमीन और कट्टों में पड़ा पका भोजन, दूसरे में भोजन के इंतजार में खड़ी सैकड़ों महिलाएं, आखिर जिम्मेदार कौन
ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा )रुद्रपुर: जिस अन्न को पैदा करने के लिए किसान दिन-रात खेतों में अपना खून-पसीना बहाता है, उसी अन्न की कथित बर्बादी ने सरकारी व्यवस्था और आयोजन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रुद्रपुर के गांधी पार्क में 26 जून को आयोजित केंद्र सरकार के “खेत बताओ अभियान” के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड के कृषि मंत्री सहित हजारों किसान शामिल हुए थे। मंच से किसानों की मेहनत की सराहना की गई और अन्न की बर्बादी रोकने का संदेश भी दिया गया। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सामने आए वीडियो ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया।
पहले वायरल वीडियो में बड़ी मात्रा में पका हुआ भोजन जमीन पर बिखरा हुआ तथा कट्टों और पॉलिथीन में भरा दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई थी। सूत्रों के अनुसार इस पर लाखों रुपये खर्च होने की चर्चा है, हालांकि इस खर्च की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर सामने आए दूसरे वीडियो ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में बड़ी संख्या में महिलाएं भोजन मिलने का इंतजार करती दिखाई दे रही हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि मौके पर मौजूद ठेकेदार ने भोजन परोसने की अनुमति नहीं दी, जबकि लोग भोजन के लिए कतार में खड़े थे। वीडियो में कुछ अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।
यदि दोनों वीडियो सही हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सैकड़ों महिलाएं भोजन का इंतजार कर रही थीं, तब उन्हें भोजन क्यों नहीं दिया गया? यदि भोजन उपलब्ध था तो उसे वितरित करने से किसने रोका? क्या यह केवल अव्यवस्था थी या फिर किसी स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई?
सोशल मीडिया पर अब यह चर्चा भी तेज है कि कहीं भोजन वितरण रोकने और बाद में भोजन की बर्बादी की स्थिति पैदा होने के पीछे किसी ठेकेदार या जिम्मेदार व्यक्ति की बड़ी लापरवाही तो नहीं थी, जिससे सरकार और प्रशासन की छवि धूमिल हुई। हालांकि, इस तरह के किसी षड्यंत्र या जानबूझकर किए गए कृत्य की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने इसे अन्न की बर्बादी बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अब लोगों की मांग है कि दोनों वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यह स्पष्ट किया जाए कि भोजन की बर्बादी किन परिस्थितियों में हुई और यदि भोजन वितरण जानबूझकर रोका गया या लापरवाही बरती गई तो संबंधित ठेकेदार, अधिकारियों अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। आखिर किसान की मेहनत से पैदा हुए अन्न का इस तरह अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

