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कच्ची शराब माफिया बेखौफ, प्रशासन खामोश,देवभूमि को नशामुक्त बनाने के दावे फेल,शहर में खुलेआम बिक रहा जहर

कच्ची शराब माफिया बेखौफ, प्रशासन खामोश,देवभूमि को नशामुक्त बनाने के दावे फेल,शहर में खुलेआम बिक रहा जहर

खबरीलाल खोज(मनीश बावा) रुद्रपुर: एक ओर उत्तराखंड सरकार “नशा मुक्त देवभूमि” का नारा देकर लगातार अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर रुद्रपुर शहर में कच्ची शराब का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि चौकी और थानों के आसपास तक कच्ची शराब बिकने की चर्चाएं आम हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ छापेमारी और खानापूर्ति तक सीमित नजर आती है।
शहर में समय-समय पर पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा छापेमारी की जाती है, कुछ लोगों को पकड़ा भी जाता है, लेकिन यह कार्रवाई स्थायी असर छोड़ती नहीं दिखती। सुबह और शाम फिर वही कारोबार शुरू हो जाता है। सवाल यह उठता है कि आखिर इन नशा कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? क्या उन्हें कानून का डर नहीं, या फिर कहीं न कहीं संरक्षण की बू तो नहीं?
पूर्व में कई बार प्रशासन ने नशा कारोबारियों की संपत्तियों की जांच और सख्त कार्रवाई की बात कही, लेकिन धरातल पर नतीजे बेहद सीमित दिखाई दिए। कई समाजसेवियों और संगठनों ने भी आवाज उठाई, आंदोलन किए, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला फिर शांत पड़ गया और कारोबार पहले की तरह चलने लगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी जनदबाव बढ़ता है तब प्रशासन सख्ती दिखाता है, लेकिन जैसे ही माहौल शांत होता है, कार्रवाई भी धीमी पड़ जाती है। यही वजह है कि लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर लगातार शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद यह अवैध कारोबार बंद क्यों नहीं हो पा रहा?
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रशासन वास्तव में नशा मुक्त अभियान को गंभीरता से लागू करना चाहता है, तो क्या सिर्फ छापेमारी काफी है? या फिर उन लोगों तक भी कार्रवाई की जरूरत है जो इस कारोबार को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं?
रुद्रपुर में कच्ची शराब का यह जाल सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि युवाओं और समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है।

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