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RTI पर ‘धारा 8(h)’ की ढाल! सूचना रोकी या सच छिपाया गया

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RTI पर ‘धारा 8(1)(h)’ की ढाल! सूचना रोकी या सच छिपाया गया
ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा) रुद्रपुर: कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) अस्पताल में सूचना का अधिकार (RTI) को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।RTI  एक्टिविस्ट मनीश बावा द्वारा मांगी गई जानकारी को धारा 8(1)(h) का हवाला देकर रोक दिया गया, जबकि इस धारा का इस्तेमाल आम तौर पर जांच में बाधा के ठोस कारण होने पर ही किया जाता है।
मामला 10-04- 2026 को दाखिल RTI आवेदन से जुड़ा है, जिसमें 5 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी। जवाब में 30 अप्रैल 2026 को भेजे गए पत्र में 4 बिंदुओं पर सूचना देने से साफ इनकार कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि संबंधित अधिकारी ने यह नहीं बताया कि आखिर सूचना देने से किस जांच पर और कैसे असर पड़ेगा।
कानूनी जानकारों का कहना है कि बिना ठोस कारण धारा 8(1)(h) का प्रयोग RTI कानून की भावना के खिलाफ है। ऐसे मामलों में अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होता है कि सूचना देने से किस प्रकार की जांच प्रभावित होगी, लेकिन यहां ऐसा कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
मनीश बावा ने आरोप लगाया है कि यह कदम सूचना को दबाने और जवाबदेही से बचने का प्रयास हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सूचना सार्वजनिक हो जाती, तो कुछ अनियमितताएं उजागर हो सकती थीं।
मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और मनीश बावा ने प्रथम अपील दायर करने की तैयारी कर ली है। यदि वहां से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामला केंद्रीय सूचना आयोग तक पहुंच सकता है, जहां दोषी अधिकारियों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
अब सवाल यह है कि—
👉 क्या सच में कोई जांच चल रही है, या फिर धारा 8 की आड़ में सच को छिपाया जा रहा है?
👉 क्या RTI जैसे सशक्त कानून को भी अब औपचारिकता बनाकर रखा जा रहा है?
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पारदर्शिता के दावे और जमीनी हकीकत में कितना फर्क है।


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