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एक साल बाद मुकदमा, फिर भी वॉइस सैंपलिंग क्यों नहीं…? मीना शर्मा प्रकरण में प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

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एक साल बाद मुकदमा, फिर भी वॉइस सैंपलिंग क्यों नहीं…? मीना शर्मा प्रकरण में प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

 

ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा) रुद्रपुर: बीते एक वर्ष से न्याय की गुहार लगा रहीं पूर्व पालिका अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री मीना शर्मा के मामले में आखिरकार प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कर लिया। लेकिन सवाल यह है कि जब दोनों पक्ष निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहे हैं, तो फिर वॉइस सैंपलिंग में देरी क्यों?
गौरतलब है कि एक वर्ष पूर्व सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी, जिसमें आपत्तिजनक और कथित रूप से महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का प्रयोग किया गया था। यह ऑडियो पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की आवाज बताया गया। मीना शर्मा का आरोप है कि इस ऑडियो से उनके चरित्र का हनन हुआ और वह लगातार पुलिस प्रशासन से न्याय की मांग करती रहीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हालात तब बदले जब मीना शर्मा धरने पर बैठीं। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। सवाल यह भी उठता है कि अगर धरना न होता, तो क्या अब भी मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहता?
इधर, ठीक अगले दिन पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के भाई संजय ठुकराल ने भी तहरीर देकर निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि जांच ईमानदारी से हो, तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी और दोषी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
अब स्थिति यह है कि-

●  मीना शर्मा वॉइस सैंपलिंग की मांग कर रही हैं,
●  ठुकराल पक्ष भी निष्पक्ष जांच की बात कर रहा है,

◆तो फिर प्रशासन आखिर किस दबाव या असमंजस में वॉइस सैंपलिंग से बच रहा है?
जब सरकार मंचों से महिला सम्मान और सुरक्षा की बात करती है, तब एक महिला नेता के खिलाफ आपत्तिजनक ऑडियो का मामला एक साल तक लंबित रहना और अब मुकदमा दर्ज होने के बाद भी जांच की अहम कड़ी—वॉइस सैंपलिंग—में देरी होना, प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल सार्वजनिक रूप से खुद को निर्दोष बताते आ रहे हैं। ऐसे में वॉइस सैंपलिंग ही वह माध्यम है, जिससे सच्चाई सामने आ सकती है। फिर प्रशासन इसे टाल क्यों रहा है?
अब सवाल साफ है—
क्या यह देरी किसी दबाव का नतीजा है, या फिर महिला सम्मान की बातें केवल कागज़ों और भाषणों तक सीमित हैं?
जनता और दोनों पक्षों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


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