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वर्षों की मेहनत के बाद भी उपेक्षा, भोजनमाताओं ने उठाई आवाज,सीईओ कार्यालय में प्रदर्शन

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भोजनमाताओं का जोरदार प्रदर्शन, मानदेय व शोषण के खिलाफ सौंपा ज्ञापन

रुद्रपुर : प्रगतिशील भोजनमाता यूनियन के आह्वान पर आज क्षेत्र की भोजनमाताओं ने मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान भोजनमाताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन कर रही भोजनमाताओं ने बताया कि उत्तराखंड राज्य की मिड-डे मील योजना के अंतर्गत कार्यरत भोजनमाताएँ वर्षों से अत्यंत विषम परिस्थितियों में कार्य कर रही हैं। वे बच्चों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराने जैसे जिम्मेदार कार्य का निर्वहन कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है और न ही सुरक्षित व गरिमापूर्ण कार्य वातावरण।

भोजनमाताओं का कहना था कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए वे पूर्व में कई बार विभागीय अधिकारियों को जिला एवं खंड स्तर पर ज्ञापन व पत्र सौंप चुकी हैं, लेकिन आज तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शासन द्वारा घोषित मानदेय भी अभी तक व्यवहार में लागू नहीं हुआ है, जिससे भोजनमाताएँ आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से गुजर रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई विद्यालयों में उनसे निर्धारित कार्य के अतिरिक्त सफाई, माली, चौकीदार एवं अन्य चतुर्थ श्रेणी के कार्य कराए जा रहे हैं, जो शोषण की श्रेणी में आता है। कई स्थानों पर भोजनमाताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आई हैं। भोजनमाताएँ स्कूल खोलने से लेकर बंद करने तक की जिम्मेदारी निभा रही हैं, जबकि शासनादेश में उनका कार्य समय मात्र तीन घंटे निर्धारित है।

भोजनमाताओं ने बताया कि अथक मेहनत के बावजूद न तो उन्हें नियमित किया जा रहा है और न ही मानदेय में कोई वृद्धि की जा रही है, जिसके विरोध में वे राज्यव्यापी हड़ताल पर हैं।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने भोजनमाताओं को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और शीघ्र समाधान का प्रयास किया जाएगा।

ज्ञापन में शासन द्वारा घोषित मानदेय को तत्काल लागू करने, मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने, अतिरिक्त कार्य कराना बंद करने, उत्पीड़न रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी करने, सामाजिक सुरक्षा व भविष्य निधि की सुविधा देने, नियमितीकरण/स्थायित्व हेतु नीति बनाने, चतुर्थ कर्मचारी का दर्जा देने, बच्चों की संख्या कम होने पर भोजनमाताओं को हटाने संबंधी शासनादेश को रद्द करने, सभी स्कूलों को धुएं से मुक्त करने, सेवानिवृत्ति पर सम्मानजनक राशि देने तथा अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा बनाए जाने वाले भोजन पर रोक लगाने की मांग की गई।

इस दौरान सुनीता, बाला, मीना, दीपा, हंसी, यशोदा, संजू, प्रमिला, तुलसी, उर्मिला, कनकलता, बबीता, सुमन, कविता, गीता, ममता, बसंती, शोभा, सुनैना, सोनमती, किरन, चंपा, शकुंतला, राजमती सहित अनेक भोजनमाताएँ मौजूद रहीं।


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