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गदरपुर में पशुओं की खालों का अवैध भंडारण बना जनस्वास्थ्य के लिए खतरा, एसडीएम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

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गदरपुर में पशुओं की खालों का अवैध भंडारण बना जनस्वास्थ्य के लिए खतरा, एसडीएम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
गदरपुर (उधमसिंहनगर): ग्राम झगडपुरी में बड़े पशुओं (भैंस) की खालों के अवैध भंडारण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। परगना मजिस्ट्रेट/उपखण्ड मजिस्ट्रेट, कैम्प गदरपुर ऋचा सिंह की अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 152 के तहत मौ० निजाम पुत्र इस्लाम निवासी ग्राम अगडपुरी को नोटिस जारी किया है।
प्रशासन को पशु चिकित्सा अधिकारी गदरपुर एवं तहसीलदार गदरपुर की संयुक्त रिपोर्ट दिनांक 19 दिसंबर 2025 को प्राप्त हुई थी, जिसमें बताया गया कि सूचना के आधार पर ग्राम झगडपुरी में मौ० निजाम के आवास के सामने बने गोदामों पर औचक छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान गोदामों में बड़ी मात्रा में भैंस की खालों के ढेर पाए गए, जिन पर नमक डाला गया था। खालों से खून व पानी बह रहा था, जो खुले में फैल रहा था।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि गोदाम के दाहिनी ओर खून और पानी जमा होने से अत्यधिक दुर्गंध फैल रही है। आसपास आबादी क्षेत्र और कृषि भूमि होने के कारण मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर गंभीर खतरे की आशंका जताई गई। मौके पर उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) के क्षेत्रीय कार्यालय काशीपुर से अधिकारी नीरज कठायत (JRF) भी उपस्थित रहे।
छापेमारी के दौरान मौ० निजाम की बहन रेशमा द्वारा N-G Traders का एक बिल प्रस्तुत किया गया, लेकिन खालों की खरीद, स्रोत और उपयोग के संबंध में कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा सकी। इसके बाद जांच के दौरान खालों को पूर्व प्रधान शराफत अली मंसूरी की सुपुर्दगी में इस शर्त पर रखा गया कि जांच पूर्ण होने तक उन्हें खुर्द-बुर्द न किया जाए।
परगना मजिस्ट्रेट ने स्वास्थ्य विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, तहसील प्रशासन, पुलिस एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया सहमति जताते हुए कहा कि उक्त प्रतिष्ठान से जनमानस के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और भविष्य में नुकसान की पूरी संभावना है।
अदालत ने BNSS की धारा 152(ख) के अंतर्गत नोटिस जारी करते हुए मौ० निजाम को आदेश दिया है कि वह तीन दिन के भीतर स्वास्थ्य विभाग, पर्यावरण/प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं पशु चिकित्सालय से संबंधित अनुमति व अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि उक्त व्यवसाय से आसपास की आबादी एवं कृषि भूमि को कोई स्वास्थ्य या पर्यावरणीय क्षति नहीं हो रही है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को देखते हुए गोदाम में संग्रहित समस्त सामग्री को नष्ट करने का आदेश पारित किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 26 दिसंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
वहीं, थानाध्यक्ष गदरपुर को निर्देशित किया गया है कि नोटिस की तामील कराकर उसकी रिपोर्ट नियत तिथि से पूर्व न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।


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