सिडकुल हेल्थ कैंप के लिए भेजी टीम, जिला अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था चरमराई,डॉ. मनोज तिवारी ने संभाला मोर्चा

ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा )रुद्रपुर: जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय प्रशासन द्वारा सिडकुल पंतनगर स्थित Voltas Limited में आयोजित दो दिवसीय स्वास्थ्य जांच शिविर के लिए मेडिकल टीम भेजे जाने के बाद मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गईं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के चलते शुक्रवार को अस्पताल पहुंचे सैकड़ों मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कई मरीज बिना उपचार कराए लौटने को मजबूर दिखाई दिए।
जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी आदेश पत्र संख्या 1658 दिनांक 20 मई 2026 के तहत 22 और 23 मई को आयोजित स्वास्थ्य शिविर में महिलाओं की स्वास्थ्य जांच एवं आयरन डिफिशिएंसी जांच के लिए चिकित्सकीय टीम की ड्यूटी लगाई गई थी। शिविर का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया।
आदेश के अनुसार डॉ. महक को चिकित्सा अधिकारी, आशा सुधी को काउंसलर, जितेन्द्र सिंह और विकास राणा को लैब टेक्नीशियन, पिंकी बोरा को नर्सिंग अधिकारी, सिमरन को फार्मेसी अधिकारी, अनिल कुमार को लैब अटेन्डेंट तथा समर सिंह मेहरा को वाहन चालक के रूप में तैनात किया गया।
इधर अस्पताल में पहले से ही डॉक्टरों और स्टाफ की कमी बनी हुई थी। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना टीम को बाहरी शिविर में भेजे जाने से ओपीडी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लग गईं और बुजुर्गों, महिलाओं तथा दूर-दराज से आए मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों और तीमारदारों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अस्पताल पहले से ही स्टाफ संकट से जूझ रहा है, तब बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए मेडिकल टीम भेजना मरीजों के हितों के साथ खिलवाड़ है।
अस्पताल में बिगड़ी व्यवस्थाओं के बीच वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मनोज तिवारी मरीजों के लिए राहत बनकर सामने आए। बताया जा रहा है कि उनकी न्यायालय में महत्वपूर्ण तारीख निर्धारित थी, लेकिन अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ और अव्यवस्था की सूचना मिलने पर वह तत्काल अस्पताल पहुंच गए। ओपीडी के बाहर लंबी कतारों में खड़े मरीजों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने स्वयं मोर्चा संभाला और लगातार मरीजों का परीक्षण कर उपचार शुरू किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई बुजुर्ग मरीज और महिलाएं घंटों से डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे, जिन्हें डॉ. तिवारी ने प्राथमिकता के आधार पर देखा और उपचार उपलब्ध कराया। उनके अस्पताल पहुंचने के बाद ओपीडी व्यवस्था कुछ हद तक पटरी पर लौट सकी।
मरीजों और स्थानीय लोगों ने डॉ. मनोज तिवारी की संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सरकारी अस्पतालों में संसाधनों और स्टाफ की कमी के बीच ऐसे चिकित्सक मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आते हैं। वहीं लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है

