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आँसू, माफी या अपराध, सौरभ राज बेहड़ प्रकरण ने कानून व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल

आँसू, माफी या अपराध, सौरभ राज बेहड़ प्रकरण ने कानून व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल

ख़बरीलाल खोज (मनीश बावा) रुद्रपुर: सौरभ राज बेहड़ प्रकरण अब महज़ एक निजी घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर राजनीतिक गलियारों और कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता तक जा पहुँचा है।
कुछ दिन पूर्व सौरभ राज बेहड़ द्वारा अपने ऊपर कथित रूप से जानलेवा हमला किए जाने के बाद उन्हें हल्द्वानी रोड स्थित फुटेला अस्पताल में भर्ती कराया गया। भर्ती की सूचना मिलते ही अस्पताल में राजनीतिक और पारिवारिक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इसी के साथ यह मामला सियासत के केंद्र में आ गया।
घटना के बाद विधायक मौके पर पहुंचे और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते नजर आए। वहीं विधायक तिलक राज बेहड़ के समधि बलवंत अरोड़ा उर्फ बल्लू ने खुद को ‘हीरो’ की भूमिका में प्रस्तुत करते हुए एसएसपी मणिकांत मिश्रा के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, इतना ही नहीं,परिवार और बच्चों तक को निशाना बनाते हुए बेहद निंदनीय शब्द कहे।
जैसे ही इस प्रकरण पर एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने सख्त रुख अपनाया, मामले में ऐसा खुलासा हुआ जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। अपने ही घर के भीतर छिपा सच सामने आते ही विधायक तिलक राज बेहड़ को प्रेस वार्ता करनी पड़ी, जहां उन्होंने आंसुओं के सहारे अपने पुत्र पर लगे दाग को धोने का प्रयास किया। ये आंसू भी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए।
अब ठीक उसी तर्ज पर सौरभ राज बेहड़ भी आंसुओं के जरिए आत्मस्वीकृति करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट में वे खुद पूरे कथित षड्यंत्र को स्वीकारते दिखाई दे रहे हैं। यही स्वीकारोक्ति अब कानून व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ी है।

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आम नागरिक पूछ रहे हैं
👉 क्या कानून व्यवस्था अब माफी तक सीमित रह गई है?
👉 अगर यही मामला किसी आम व्यक्ति का होता, तो क्या उसे भी आंसुओं और माफी से राहत मिल जाती..?

दूसरी ओर, प्रशासन सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और अभद्र भाषा पर तत्काल कार्यवाही करता रहा है। ऐसे में सवाल यह भी है कि बलवंत अरोड़ा बल्लू द्वारा एसएसपी और एसएसपी के बच्चों तक की गई अभद्र टिप्पणी क्या कानून के दायरे से बाहर है…..?
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि
🔴 जब सौरभ राज बेहड़ स्वयं अपने कृत्य को स्वीकार कर रहे हैं, तो क्या पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्ट को आधार बनाकर कानूनी कार्यवायी करेगी….?
🔴 या फिर यह मामला भी केवल ‘माफी’ तक ही सिमट कर रह जाएगा….?
फिलहाल, यह देखना बेहद अहम होगा कि कानून अपना रास्ता खुद तय करता है या फिर राजनीतिक रसूख के आगे एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ा नजर आता है।

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